एक ही चीज़ है जो बहुमत को नहीं मानती और वह है मनुष्य की अंतरात्मा।


एक ही चीज़ है जो बहुमत को नहीं मानती और वह है मनुष्य की अंतरात्मा।

– हार्पर ली, टु किल ए मॉकिंग बर्ड

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